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VOL. 1, ISSUE 1 (2016)
भारतीय लोक काव्य का स्वरूप
Authors
जयराम त्रिपाठी
Abstract
हिन्दी प्रदेश में मौखिक लोककाव्य लिखित लोककाव्य की अपेक्षा अधिक मात्रा में मिलता है। मौखिक लोक काव्य ऐसा लोककाव्य है जिसका रचनाकार आज्ञात होता है और गायक अपने ढंग से अपनी लय में गाता है। लोक काव्य पहले से चले आ रहे हैं जिनकों नये गायक अनुसरण करते हैं और मौखिक लोक काव्य लोक समाज में जीवित है। भोजपुरी के लोक साहित्य के संग्रह का श्री गणेश यूरोपीय विद्धानों ने किया, जिनमें अधिकांश इस देश में सिविल सर्विस में होकर आए थे। ऐसे विद्वानों मे सर चार्ज ग्रियर्सन का नाम मुख्य हैं जिन्होंने आज से 80 वर्ष पूर्व भोजपुरी लोकगीतों के संकलन का कार्य प्रारम्भ किया था।
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Pages:12-14
How to cite this article:
जयराम त्रिपाठी "भारतीय लोक काव्य का स्वरूप ". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 1, Issue 1, 2016, Pages 12-14
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