Logo
International Journal of
Multidisciplinary
Education and Research

Search

ARCHIVES
VOL. 6, ISSUE 3 (2021)
विपणन और विपणन प्रबन्ध की महत्ताः एक अध्ययन
Authors
प्रिंस कुमार मिश्रा, प्रभाकर पाण्डेय
Abstract
भारत में विपणन की अत्यन्त आवश्यकता है। विपणन विचार का क्रियात्मक रूप ही विपणन प्रबन्ध होता है। यह उन समस्त क्रियाओं से जुड़ा है जो ग्राहको की आवश्यकताओं से अवगत कराने में सहायक है। विपणन से तात्पर्य ऐसे व्यापक विचार एवं क्रिया क्षेत्र से है, जिसमें वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन से पूर्व की जाने वाली, क्रियाओं से लेकर उनके वितरण और आवश्यक विक्रयोपरान्त सेवाओं तक को सम्मिलित किया जाता है। विपणन प्रबन्ध सम्पूर्ण प्रबन्ध का ही एक भाग है। वर्तमान युग में विपणन का तीव्र प्रतिस्पर्धा एवं औद्योगिक काल के प्रत्येक व्यवसायी के प्रबन्ध में महत्वपूर्ण योगदान है। विपणन कार्य समाप्त होने से विपणन प्रक्रिया समाप्त नहीं हो जाती है। यह तो निरन्तर रूप से चलने वाली प्रक्रिया है। विपणन प्रबन्ध का महत्व का क्षेत्र व्यवसायियों के लिये महत्व, ग्राहकों के लिये महत्व, समाज के लिये महत्व एवं राष्ट्र के लिये महŸव प्रमुख रुप से हैं। इसका उद्देश्य उपभोक्ताओं की आवश्यकताओं को सन्तुष्ट करते हुये लाभ कमाना व उनके जीवन स्तर को ऊंचा उठाना है।
Download
Pages:01-03
How to cite this article:
प्रिंस कुमार मिश्रा, प्रभाकर पाण्डेय "विपणन और विपणन प्रबन्ध की महत्ताः एक अध्ययन ". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 6, Issue 3, 2021, Pages 01-03
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.