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VOL. 6, ISSUE 3 (2021)
स्वतन्त्रतापूर्व भारत में प्राथमिक शिक्षा का विकास
Authors
डाॅ. सुभाष सिंह
Abstract
शिक्षा व्यक्ति, समाज और राष्ट्र के सर्वोन्मुखी विकास का प्रभावी उपकरण है। शिक्षा द्वारा मनुष्य अपने जीवनलक्ष्यों के ज्ञान और अधिगम में समर्थ होता है, परिवार का समुचित परिपालन करता है, समाज का उपयोगी सदस्य और राष्ट्र का जिम्मेदार नागरिक बनता है। भारत वर्ष में प्राथमिक शिक्षा का इतिहास बहुत पुराना है। सुदूर अतीत में भारत की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था से शुरू करके इतिहास के विभिन्न चरणों में प्रचलित प्राथमिक शिक्षा पद्वतियों और आधुनिक समय में प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के प्रयासों का संक्षिप्त विवरण इस पत्रक में प्रस्तुत करने का प्रयास किया गया है।
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Pages:37-39
How to cite this article:
डाॅ. सुभाष सिंह "स्वतन्त्रतापूर्व भारत में प्राथमिक शिक्षा का विकास ". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 6, Issue 3, 2021, Pages 37-39
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