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VOL. 8, ISSUE 1 (2023)
साहित्य समाज का अन्तः सम्बन्ध
Authors
डॉ. अनीता यादव
Abstract
साहित्य और समाज का आपस में घनिष्ठ सम्बन्ध है। दोनों एक दूसरे के पूरक है। साहित्य समाज का दर्पण एवं प्रतिबिम्ब है। साहित्य द्वारा ही हम अपने राष्ट्रीय इतिहास से, अपने देश की गौरव गरिमा से अपनी संस्कृति एवं सभ्यता से अपने पूर्वजों के अनुभव से विचारों एवं अनुसंधानों से अपने प्राचीन रीति-रिवाजों से रहन-सहन और परम्पराओं से परिचय प्राप्त कर सकते है। साहित्य समाज की चेतना का परिष्कार कर नवीन स्फूर्ति प्रदान करता है। मानव समाज की आवश्यक ऊर्जा माना जाता है। वह मनुष्य को अत्याचार, और अभाव से लड़ने की शक्ति देता है। स्वहित तथा लोकहित का अन्तर समझाता है। लोकमंगल की भावना जागृत कर भविष्य के प्रति आशा एवं उत्साह का भाव जगाता है। साहित्य का सौन्दर्य उसकी सामाजिक उपयोगिता ही है। वह व्यक्ति और सामाजिक रूप में मानव कल्याण का उपकारक और उपद्वेष्टा है। इससे ही सत्य, शिव, सुन्दरम् की भावना पल्लवित होती है।
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Pages:97-98
How to cite this article:
डॉ. अनीता यादव "साहित्य समाज का अन्तः सम्बन्ध". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 8, Issue 1, 2023, Pages 97-98
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