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VOL. 8, ISSUE 2 (2023)
वर्तमान में प्राथमिक शिक्षा
Authors
राजकुमार सिंह
Abstract
शिक्षा के माध्यम से ही बच्चों की प्रवृत्तियों का शोधन और परिष्कार होता है जिससे उसका व्यवहार संतुलित एवं नियंत्रित होता है। व्यक्ति की आदतों के निर्माण में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका होती है अर्थात् विद्यार्थी जैसी शिक्षा पाते हैं उसी के अनुरूप उनमें आदतों का निर्माण होता है। अशिक्षित व्यक्ति को वर्तमान समाज में अच्छे नजरिये से नहीं देखा जाता है। इसलिए प्रत्येक माता-पिता अपने बच्चे को शिक्षित करने का पूरा प्रयास करते हैं। शिक्षा का मुख्य आधार प्राथमिक शिक्षा है। आज भी ग्रामीण क्षेत्रों में अभिभावक अपने निजी कारणों से बच्चों को प्राथमिक स्तर तक विद्यालय में बालको को पढ़ाने के बाद खेती या अन्य रोजगारपरक कार्यों में लगा देते हैं। इस कारण बहुत से बच्चे शिक्षा से वंचित रह जाते हैं और प्राथमिक शिक्षा के लोकव्यापीकरण के प्रयास में कमी आती हैं। इस समस्या के समाधान हेतु सरकार द्वारा विभिन्न योजनाएं चलायी जा रही है और काफी बजट भी खर्च किया जा रहा है किन्तु परिणाम अपेक्षाकृत संतोषजनक नहीं है। इसके लिए दोषपूर्ण सरकारी नीतियों, शिक्षण प्रणाली, अध्यापकों की अध्यापन कार्य के प्रति धारणाएँ और विभिन्न प्रकार की क्षेत्रीय व सामाजिक समस्याएं जिम्मेदार है। शिक्षा समाज का संस्थापक भाग है। शिक्षा के द्वारा व्यक्ति का सर्वांगीण विकास होता है। सारांश में प्रस्तुत शोध आलेख में शोधार्थी ने इन्हीं प्रमुख बिंदुओं पर चर्चा की है। शिक्षा को क्षमताओं में अभिवृद्धि स्वतंत्रता का विस्तार हर तरह के भेदभाव शोषण के प्रतिकार करने का उपकरण माना जाता है। इस पत्र में यह समस्या से संबंधित गहन चिंतन मनन भी किया गया है और सरकारी विभिन्न योजनाओ का तुलनात्मक वर्णन करते हुए समस्या के संभावित समाधान भी प्रस्तुत किए गए हैं।
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Pages:69-73
How to cite this article:
राजकुमार सिंह "वर्तमान में प्राथमिक शिक्षा". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 8, Issue 2, 2023, Pages 69-73
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