Logo
International Journal of
Multidisciplinary
Education and Research

Search

ARCHIVES
VOL. 8, ISSUE 3 (2023)
गुटनिरपेक्ष आंदोलन की उत्पत्ति में भारत की भूमिका का आलोचनात्मक अध्ययन
Authors
पवन कुमार
Abstract
द्वितीय विश्व युद्ध के पश्चात् सम्पूर्ण विश्व दो शक्तिशाली गुटों अर्थात् अमेरिका तथा सोवियत संघ गुट में विभाजित हो गया था। अतिशीघ्र ही विश्व में सर्वोच्च शक्ति बनने के लिए  इनमें शीत युद्ध आरंभ हो गया जो सोवियत संघ के विघटन के समय तक चलता रहा। अमेरिका गुट में अमेरिका, कनाड़ा, फ्रांस, इटली, पाकिस्तान आदि राष्ट्र सम्मिलित थे जबकि सोवियत गुट में रूस, पोलैण्ड, हंगरी आदि शामिल थे। इनमें से कुछ देश ऐसे थे जिन्होंने कुछ ही समय पूर्व स्वतंत्रता प्राप्त की थी। वे इन दोनांे गुटों में से किसी की भी सदस्यता ग्रहण नहीं करना चाहते थे। क्योंकि उनका मानना था कि इन देशों की गुटबंदी के चक्कर में पड़ने से उन्हें काफी हानि हो सकती है। अतः ये देश गुट-निरपेक्षता की नीति पर चले। इन देशों में भारत, मिस्त्र, यूगोस्लाविया आदि देश शामिल थे। गुटनिरपेक्षता का अर्थ तटस्थता नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में विभिन्न मुद्दों पर विवेकपूर्ण निर्णय लेते हुए सही और गलत का अंतर करते हुए सदैव सही नीति का समर्थन करना और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाना ही गुटनिरपेक्षता है। इस तरह यह कोई पलायनवादी नीति नहीं है। 1955 ई॰ में बांडुग सम्मेलन (इण्डोनेशिया) में गुटनिरपेक्षता की संकल्पना सामने आई जो गुटनिरपेक्ष आंदोलन की औपचारिक शुरूआत मानी जाती। गुट निरपेक्ष आंदोलन ने सदैव एक ‘स्वतंत्र’ राजनीतिक पथ बनाने का प्रयास किया, ताकि सदस्य राष्ट्र को  दो महाशक्तियों के वैचारिक युद्ध के बीच फँसने से बचाया जा सके।
Download
Pages:46-47
How to cite this article:
पवन कुमार "गुटनिरपेक्ष आंदोलन की उत्पत्ति में भारत की भूमिका का आलोचनात्मक अध्ययन". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 8, Issue 3, 2023, Pages 46-47
Download Author Certificate

Please enter the email address corresponding to this article submission to download your certificate.