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VOL. 1, ISSUE 3 (2016)
वेदांत दर्शन के क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों का परिचय
Authors
डॉ. अखिल सिंह
Abstract
स्वामी विवेकानंद के पूर्व सामान्यतः जनसमुदाय में यह धारणा व्याप्त थी कि वेदांत आदि विषयों का सामान्य मनुष्यों से कोई भी सम्बन्ध नहीं है। वेदांत का सम्बन्ध या तो गेरूए वस्त्रधारी संन्यासियों के लिए है या फिर केवल उन बुद्धिजीवियों के लिए है जोकि दार्शनिक विद्वान हैं। स्वामी विवेकानंद का मानना था कि जीव ही शिव है। अर्थात् मानव सेवा ही ईश्वर की सच्ची भक्ति है। वह आदर्श और व्यवहार के, सिद्धान्त और आचरण के भय की दीवार को तोड़ने वाले वे प्रथम कर्मयोगी थे। उन्होंने यह उद्घोष किया कि ‘‘जो दर्शन मनुष्य के दैनिक जीवन की समस्याओं को हल नहीं करता और जो धर्म मनुष्य की सामान्य उलझनों को भी नहीं सुलझा सकता, ऐसा दर्शन और धर्म आज के युग के लिए अनुपयोगी और निरर्थक है। स्वामी विवेकानंद ने धर्म की विवेचना करते हुए मानव सेवा को केन्द्र में रखकर जिस जीवन शैली की कल्पना की वह नैतिकता के तंत्र की स्थापना का आधार है। व्यावहारिक वेदांत मूलभूत ऐक्य में मानव मस्तिष्क में आदर्श जीवन, प्रकृति और लौकिक भावना की गहरी समझ विकसित करता है।
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Pages:53-54
How to cite this article:
डॉ. अखिल सिंह "वेदांत दर्शन के क्षेत्र में स्वामी विवेकानंद के सिद्धांतों का परिचय ". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 1, Issue 3, 2016, Pages 53-54
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