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VOL. 6, ISSUE 3 (2021)
प्राचीन भारतीय ज्ञान, साहित्य, परम्परा और वर्ण, जाति
Authors
डॉ. प्रवेश कुमार
Abstract
वैदिक ग्रंथो में जब हम भारतीय समाज के मूल स्वरूप को देखने, खोजने का प्रयास करते हैं तो पाते है कि प्राचीन भारतीय समाज- व्यवस्था अधिक उन्नत एवं व्यवस्थित रूप में दिखाई पड़ती है। आपसी विद्वेष और संघर्ष का प्रायः अभाव है क्योंकि व्यक्ति का पूर्ण आचरण ही धर्म पर आधरित है। हमारी वैदिक ज्ञान, साहित्य एवं शासनिक व्यवस्था दुनिया के अन्य देशों से पहले ही भारत में सुचारु रूप से संचालित थी। समाज का विभाजन वर्ण के अनुसार था, लेकिन ये वर्ण कोई जन्म से ही प्राप्त हो जाए अथवा व्यक्ति को वर्ण नियत कार्य में ही लगे रहना है ऐसी कोई बाध्यता भी हमें हमारे वैदिक टेक्स्ट में देखने को नहीं मिलती है। भारत का सम्पूर्ण समाज सम्यक् दृष्टि एवं सामाजिक समरसता के मूल सिद्धांत पर बिना किसी अवरोध के विकसित एवं पल्लवित हो रहा था।
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Pages:59-62
How to cite this article:
डॉ. प्रवेश कुमार "प्राचीन भारतीय ज्ञान, साहित्य, परम्परा और वर्ण, जाति ". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 6, Issue 3, 2021, Pages 59-62
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