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VOL. 8, ISSUE 2 (2023)
भारत में औद्योगिकरण की समस्याओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन
Authors
अनूप
Abstract
अठारहवीं तथा उन्नीसवीं शताब्दी में संसार के जिन देशों में औद्योगिकरण तीव्र गति से हुआ वे बीसवीं शताब्दी के विकसित देशों के वर्ग में आ गये। अतः यह माना जाने लगा कि विकासशील देशों के विकास का मूल मंत्र औद्योगिकरण है। किंतु बीसवीं शताब्दी में भी जब परिवहन और संचार समुचित विकसित हैं, ज्ञान तथा आवश्यक वस्तुओं का आदान-प्रदान अपेक्षया सरल हो गया है, विकासशील देश न तेजी से औद्योगिकरण कर पा रहे हैं और न विकास की गति ही अधिक तीव्र है। संसार में विभिन्न देश विकास को अनेक सीढ़ियों पर खड़े हैं। विकास के लिए उनकी समस्याएं भी भिन्न-भिन्न है तथा उनके निदान भी समान नहीं है। अधिकतर देशों में धन का समान विभाजन नहीं है। विकासशील देशों में जनसंख्या की समस्या भी भिन्न-भिन्न है। दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों में पिछले दो-तीन दशकों में हुए जनसंख्या विस्फोट ने गंभीर समस्या पैदा कर दी है। यहां विकास के सभी प्रयत्न बढ़ती हुई जनसंख्या व्यर्थ हो जाते हैं तथा न प्रति व्यक्ति आय और न उत्पादन हो बढ़ता हुआ मालूम देता है। इसके विपरीत ब्राजील तथा घाना जैसे देशों में न्यून जनसंख्या की समस्या है और वहां हुआ थोड़ा विकास प्रति व्यक्ति आय तथा उत्पादन में परिलक्षित होने लगता है।
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Pages:17-18
How to cite this article:
अनूप "भारत में औद्योगिकरण की समस्याओं का विश्लेषणात्मक अध्ययन". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 8, Issue 2, 2023, Pages 17-18
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