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VOL. 8, ISSUE 2 (2023)
हिन्दी और मराठी भाषा में स्थित अंतःसंबंध
Authors
डॉ. विजय श्रावण घुगे
Abstract
भाषा बहते नीर की तरह होती है। मौखिक और लिखित ये भाषा के दो रूप होते है। भारत में अनेक भाषाएँ बोली जाती है। डॉ. वासुदेव नंदन प्रसाद लिखते है- “भारतीय भाषा के इतिहास में ५०० ई. से १००० ई. तक के काल को ‘अपभ्रंष’ कहा गया है। आधुनिक आर्य भाषाओं की उत्पत्ति इन्हीं अपभ्रंशों से हुई है”।1 हिंदी की मूल उत्पत्ति शौरसेना से तथा मराठी की उत्पत्ति महाराष्ट्री अपभ्रंश से हुई है। हिंदी तथा मराठी के अंतःसंबंध को लेकर डॉ. हरदेव बाहरी लिखते है-“महाराष्ट्र प्रदेश की आधुनिक आर्यभाषा तीन प्रमुख बोलियाँ है- खड़ी बोली मराठी, बरारी (वैदर्भी), और कोंकणी। कोंकणी पर द्रविड़ का प्रभाव बहुत अधिक है। पूना की खड़ी बोली ही साहित्यिक भाषा है। पहले उत्तर की मराठी आदर्श मानी जाती थी। बस्तर में एक बोली हल्बी नाम से है। उसमें पूर्वी हिंदी और मराठी के समिश्रण पाये जाते है”।2
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Pages:61-62
How to cite this article:
डॉ. विजय श्रावण घुगे "हिन्दी और मराठी भाषा में स्थित अंतःसंबंध". International Journal of Multidisciplinary Education and Research, Vol 8, Issue 2, 2023, Pages 61-62
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